Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
कदलीस्तम्भसम्भारसुन्दरीभिस्तथा भृता ।
कुचशोभोचितानन्दा तोरणालिर्विराजते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार कदली के स्तम्भयुगलरूपी जंघाओं की सामग्री से युक्त सुन्दर रमणियों के द्वारा धारण
की गई तथा स्तनरूप कलशो की शोभा से द्रष्टाओं के नेत्रो को आनन्द देनेवाली तोरणपंक्ति यानी
काम-मन्दिर की तोरणमालारूप रूप करधनी सुशोभित हो रही है, इत्यादि रूप से कवि लोग करधनी
का जो वर्णन करते हैं, वह भी अज्ञान का विलास है