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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 7, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 7, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 7 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

आपातमन्दमधुरा मध्ये द्वन्द्वानुबन्धिनी । शीघ्रावसानविरला लक्ष्मीरप्यभिवाञ्छ्यते ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

आरम्भ-आरम्भ में मन्द लोगों को अत्यन्त मधुर लगनेवाली अथवा ऊपर-ऊपर से थोड़ी मोटी, व्ययकाल में राग-द्वेष आदि द्वन्दों से पर्यवसित होनेवाली तथा शीघ्र क्षयस्वभाव होने या कुछ लोगों में ही दिखाई पड़ने के कारण विरल रूपता को धारण करनेवाली लक्ष्मीकी भी जो अभिलाषा की जाती है, वह भी अज्ञान का प्रभाव है