Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 70, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 70, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 70 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अस्ति विन्ध्यमहाटव्यां वेतालो विपुलाकृतिः ।
स किंचिन्मण्डलं गर्वादाजगाम जिघांसया ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
विन्ध्याचल की महाटवी में एक दीघाकृति वेताल था।
किसी समय वधयोग्य अज्ञानीजनों में अनादर के कारण उनको मार डालने की इच्छा से वह किसी
मण्डल में गया