Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 74, Verses 1–2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 74, verses 1–2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 1,2
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
यथा चित्तचमत्कृत्या राज्ञो गङ्गावतारणम् ।
भगीरथस्य संपन्नं तन्मे कथय भो प्रभो ॥ १ ॥
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
आसीद्भगीरथो नाम राजा परमधार्मिकः ।
भुवः समुद्रयुक्ताया मण्डलीतिलकोपमः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
दुःसाध्य अर्थ भी जिस रीति से सिद्ध हुआ वह मुझसे कहिए । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी,
चारों समुद्रो से युक्त पृथिवी का अत्यन्त धार्मिक एक भगीरथ नाम का राजा हुआ | वह अपनी
कोशलमण्डली में तो तिलक के समान था