Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अतीता वर्तमाना च सत्येवासत्यवत्सदा ।
नित्यमत्यन्ततरुणी नित्यं शोषमुपेयुषी ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वह अतीत काल में थी ओर वर्तमान काल में भी है, वह सर्वदा
असत्पदार्थ के सदृश होती हुई भी सत्य पदार्थ के सदृश बार-बार अत्यन्त पल्लवित होती है तथा
नित्य शोष को प्राप्त होती हे