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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

महाविषलतैषा हि संसारविषमूर्च्छनाम् । ददाति रभसाश्लिष्टा परामृष्टा विनश्यति ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

यह कार्य अविद्या निश्चय ही महती विषलता है, क्योकि अविचार से इसका आश्लेष यानी सम्बन्ध होने पर यह तत्क्षण संसाररूप विष से जनित मूर्च्छा देती है और पूर्वापर विचारित होनेपर तत्क्षण नष्ट हो जाती है