Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
इतस्तम इतस्तेज इतः खमित उर्वरा ।
इतः शास्त्रमितो वेदा इतो द्वयविवर्जिता ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सृष्टिरूपी लता कहीं तो तमरूप है, कहीं तेजोरूप है, कहीं
आकाशरूप है, कहीं सस्यश्यामला (अशेष विशेष धान्यो से पूर्ण) है, कहीं पृथिवीरूप है, कहीं
शास्त्ररूप है, कहीं वेदरूप है तो कहीं प्रलय ओर सुषुप्ति से विवर्जित है