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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

क्वचित्खगतयोड्डीना क्वचिद्देवतयोत्थिता । क्वचित्स्थाणुतया रूढा क्वचित्पवनतां गता ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पक्षिरूप होकर उडती है, कहीं देवरूप होकर उत्थित होती है, कहीं स्थाणु होकर स्थित है ओर कहीं पवनभाव को प्राप्त हुई है