Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 8, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 8, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 8 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
नानाविधोल्लासवती वासना मोदशालिनी ।
घनप्रवालतरला तनुरस्या विजृम्भते ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रसंगप्राप्त विषय का उपपादन कर प्रस्तुत लता का ही वर्णन करते हैं।
नानाप्रकार के उल्लासो से युक्त वासनारूप सुगन्धि से शोभित, घनीभूत पल्लवो से चंचल इस
सृष्ट्रूप लता का शरीर प्रकाशमान हो रहा है