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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 80, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 80, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 80 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

राज्यादिमोक्षपर्यन्ताः समस्ता एव संपदः । देहानिलविधेयत्वात्साध्याः सर्वस्य राघव ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

प्राणो के अपने अधीन हो जानेपर यानी प्राणो के ऊपर अपना सब नियन्त्रण हो जाने पर उनसे सम्बद्ध सिदिर्यो भी अपने अधीन हो जाती हैं - यह कहते है । हे राघव, देह के वायु के अपने अधीन हो जाने से यानी देहस्थ वायु के ऊपर अपना नियन्त्रण हो जाने से राज्य से लेकर मोक्षपर्यन्त सभी सम्पत्तियाँ सबको सुखसाध्य हो जाती हैं