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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 89

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 81, verse 89 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 89

संस्कृत श्लोक

प्रत्यक्षवदभावोऽपि प्रमैव रघुनन्दन । अग्न्यभावोऽपि शीतस्य प्रमाणं सर्वजन्तुषु ॥ ८९ ॥

हिन्दी अर्थ

अनुपलब्धि प्रमाण नहीं है-इस संदेह का निवारण करते हैं। हे रघुनन्दन, प्रत्यक्ष के समान अभाव भी प्रमाण ही है, क्योकि यह सब जन्तुओं को भलीभाँति विदित है कि शीत के परिज्ञान में तेज का अभाव भी प्रमाण होता है