Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 81, Verse 96
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 81, verse 96 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 81 · श्लोक 96
संस्कृत श्लोक
नाशात्मकतया तोयमौष्ण्यत्वादेति ह्यग्निताम् ।
बिनाशपरिणामेन तत्तोयं वह्निकारणम् ॥ ९६ ॥
हिन्दी अर्थ
और उसमें जो शैत्य और द्रवत्व का नाश तथा उष्णता और रुक्षता की जो उत्पत्ति है, उस अंश में
विनाशपरिणामता भी है ही, इसलिए यह उदाहरण दोनों परिणामो का है ।
नाशात्मकरूप से उष्णस्वरूप होने के कारण जल भी अग्निरूपता को प्राप्त हो जाता है, अतः
विनाशपरिणाम से वह जलरूप चन्द्रमा अग्नि का कारण हे