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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 85, Verse 144

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 85, verse 144 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 144

संस्कृत श्लोक

देहनाडीप्रणालेन याति शुक्रं बहिः स्वतः ॥ १४४ ॥

हिन्दी अर्थ

यह जो आपने पहले कहा था, उसमें स्वभाव शब्दार्थ क्या है ? यों राजा पूछते हैं। राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, वचनो से जाने जाते हैं कि आप बड़े ही तत्त्वज्ञानी है, आत्मज्ञान होने के पूर्वं की जो संसार की स्थिति थी, उसे भी तर्कादि से आप जानते है, इसलिए आप कृपाकर बतलाइए कि “स्वभाव” शब्द से क्या कहा जाता हे