Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 87, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
यद्वक्षि तदुपादेयं मया विधिरिव श्रुतेः ।
अविचारितमेवाशु सत्यमेतद्वचो मम ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुने, जिस तरह श्रुति की “स्वर्गकामो यजेत" इत्यादि
निर्दोष प्रामाण्य से निश्चित विधि शिष्ट पुरुषों द्वारा निःसन्देह गृहीत की जाती है, उसी तरह आप जो
कुछ भी कहेंगे, उसे मैं तत्काल ही ग्रहण कर लूँगा, यह मेरा वाक्य आप सत्य ही जानिये