Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 87, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 87, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
देवपुत्रोऽसि जानासि सर्वमेव यथास्थितम् ।
लोकवृत्तान्ततज्ज्ञोऽसि किमन्यत्कथयाम्यहम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा शिखिध्वज ने कहा : मुनिवर, आप देवपुत्र हैं, सभी कुछ ठीक-ठीक जानते हैं। लोकवृत्तान्त
ओर परमार्थवृत्तान्त भी जानते हैं, फिर भी आपके जानने योग्य और दूसरी कौन-सी वस्तु कहूँ