Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 9, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
भाग एष त्वविद्याया एवं विद्यात्वमागतः ।
बीजं फलत्वमायाति फलमायाति बीजताम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रश्न के समाधान का उपसंहार कर प्रस्तुत विषय की प्रस्तावना करते है।
इस प्रकार विद्यारूपता को प्राप्त हुआ यह जो अविद्या का सात्त्विकस्वरूप बीज -भाग है, वह
फलरूपता यानी कार्यअविद्यारूपता को प्राप्त होता है ओर उसका प्रलय होनेपर बीजरूपता यानी
कारणअविद्यारूपता को प्राप्त होता हे