Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 9, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
उदेत्यविद्या विद्यायाः सलिलादिव बुद्बुदः ।
विद्यायां लीयतेऽविद्या पयसीव हि बुद्बुदः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
कार्यअविद्या के उदय ओर प्रलय का आधार होने से भी विद्याशरीरी वे शिवादि अविद्यारूप ही
हैं, यो कहते है ।
कारण अविद्या के अन्तगर्तं जो शुद्ध सत््व-अंश है, वह विद्या है, उस विद्या से अविद्या
(कार्यअविद्यारूप सृष्टि) उस प्रकार उदित होती है, जिस प्रकार जल से बुदबुदे उत्पन्न होते हैं और
जिस प्रकार बुदबुदे जल में लीन हो जाते हैं, उसी प्रकार उस विद्या में ही कार्य अविद्यात्मक सृष्टि
विलीन हो जाती है