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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 9, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 9, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

वटश्च वटधानायामिव पुष्पफलादिमान् । सर्वशक्तिर्हि किंचित्त्वं सर्वशक्तिसमुद्गकम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

सर्वविध शक्तियों का आश्रय ही किंचित्‌ वस्तुरूपत्व है, वही समस्त पराक्रमो की पिटारी है। वह आकाश से भी बड़ा शून्यस्वरूप है और चिदात्मक होने से शून्यस्वरूप भी नहीं है