Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 91, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
गजस्त्वमाशा निगडानि वैरी मोहो निखातः पुनरुग्रबन्धः ।
महीतलं विन्ध्य उदन्त इत्थं त्वदीय उक्तः कुरु यत्करोषि ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
विन्ध्याचल है यह महीतल | इस तरह आपका वृत्तान्त मैंने हाथी के आख्यान द्वारा कह दिया । इसे
अच्छी तरह जानकर तपस्यारूपी गड्ढे से निकलकर उस अपने शत्रु के नाश के लिए जो कुछ कर
सकते हैं, उसी शीघ्र कीजिये, देरी मत कीजिये