Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 92, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
चूडालोवाच ।
यदुक्तं नयशालिन्या तया विदितवेद्यया ।
तदा चूडालया ज्ञानं तत्कस्मान्नोररीकृतम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
“जब आप जंगल को चले, उसी समय मूच्छित होकर गिरे हुए अज्ञान को आपने जान से नहीं मारा”
यह जो आपने कहा, यह ठीक है, परन्तु उस समय मुझे मनस्त्याग का किसने उपदेश दिया ? जिसकी
कि मैने उपेक्षा की ? इस प्रकार राजा की शंका का तर्कं कर रही कुम्भरूपिणी चूडाला कहती है।
चूडाला ने कहा : हे राजन्, नीतिनिपुण उस चूडाला ने, जिसने ज्ञेय वस्तु का अच्छी तरह ज्ञान कर
लिया था, उस समय जिस ज्ञान का आपको उपदेश दिया, आपने उसे क्यो नहीं स्वीकार किया ?
सर्ग सन्दर्भ
इक्यानवेरवौँ सर्ग समाप्त बानबेवाँ सर्ग कुम्भरूपिणी चूडाला की ऐसी बातें सुनकर सर्वत्याग में तत्पर हुए उस राजा ने वन आदि का त्याग कर तपस्या में उपयोगी अपने सम्पूर्ण पापों को अग्नि में क दिया-यह वर्णन ।