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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 91, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

कदाचित्सुकरं शस्त्रशृङ्खलाबन्धभेदनम् । न त्वस्य मनसः साधो भोगाशाविनिवारणम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे साधो, कदाचित्‌ शस्त्र ओर श्रृंखला बन्धन का भेदन सहज में हो सकता हे, परन्तु भोगों की आशा का निवारण इस मन से सहज में नहीं हो सकता