Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 91, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 91, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यद्बभञ्ज गजः शत्रोः शृङ्खलाजालबन्धनम् । तत्तत्याज भवान्भोगभूमिं राज्यमकण्टकम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

दन्ताभ्यां यत्नतस्ताभ्याम्‌“ (बड़े प्रयत्न से उस हाथी ने अपने समर्थ उन दोनों दतो से) इस उक्ति का तात्पर्य कहते हैं। जो अपने शत्रु के श्रृंखलाजाल बन्धन को हाथी ने तोड़ दिया, वह आपने भोगभूमि अकण्टक अपने राज्य का त्याग कर दिया