Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 92, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
दृष्टानि धर्मस्थानानि विश्राम्याम्यधुना सखि ।
इत्यक्षमालां ज्वलने चिक्षेपोक्त्वा शिखिध्वजः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सखि, मेने अनेक धर्मस्थान देख लिये,
अब विश्राम ले रहा हूँ - यह कहकर राजा शिखिध्वज ने अक्षमाला आग में उस तरह फेंक दी, जिस
तरह प्रलयकालाग्नि में पवन आकाश की नक्षत्रमाला (७) फेंक देता है