Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 92, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 92, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तवास्त्येवापरित्यक्तः सर्वस्माद्भाग उत्तमः ।
तं परित्यज्य निःशेषमायास्यसि विशोकताम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार में तादात्म्य से आत्मा ही राज्यादि सबका स्वामी बन बैठा है, यदि आप यह कहें, तब तो
एक उसीके त्याग से सर्वत्याग सिद्ध हो जायेगा, दूसरे के त्याग से नहीं। और आपने तो उस अहंकार का
त्याग अभी तक किया ही नहीं, इस आशय से कहते हैं।
हे राजन्, सबसे उत्तम भाग जो आपका मन या अहंकार है वह तो अभी तक अपरित्यक्त ही है।
उसका पूर्णरूप से परित्याग कर आप शोकशून्य होगे