Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 93, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 93, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
समस्तवस्तुनिष्कासे यथा त्वमवशिष्यसे ।
सर्वत्यागे कृते तादृग्विज्ञानमवशिष्यते ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वत्याग में शून्यतापत्ति का वारण करते हैं।
राज्यादि सम्पूर्ण वस्तुओं का त्याग कर देने पर जैसे अकेले आप अवशिष्ट रह गये हैं वैसे ही सबका
त्याग कर देने पर विज्ञानात्मा ही एक अवशिष्ट रह जाता है