Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 93, Verses 7–8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 93, verses 7–8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 7, 8
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
वासनां तत्र संत्यज्य सर्वत्यागी स्थितो ह्यहम् ।
अहो नु चिरकालेन देवपुत्र प्रबोधितः ॥ ७ ॥
संपन्नः केवलः शुद्धः सुखेनोद्बोधवानहम् ।
किं नाम किल वस्त्वेतद्भवेत्सांकल्पिकक्रमम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, अहो, चिरकाल के बाद आपसे ज्ञान पाकर सब वस्तुओं में
ममता छोड़कर अब में सर्वत्यागी बनकर स्थित हो गया हूँ। अब मैं केवल, शुद्ध सुख से सम्पन्न ज्ञानवान्
हो गया हूँ । ममतासंकल्पप्रयुक्त संग्रहक्रम जिसमें उपस्थित है, ऐसा यह सब सामान किस काम का ?
कहने का तात्पर्य यह है कि जिस पदार्थ में कुछ सार नहीं है वह पास में रखने योग्य नहीं है