Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
कुम्भ उवाच ।
अहंबीजश्चित्तद्रुमः सशाखाफलपल्लवः ।
उन्मूलय समूलं तमाकाशहृदयो भव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
कुम्भ ने कहा : हे राजन्,
शाखा, फल ओर पल्लवां से युक्त चित्तरूपी वृक्ष का अज्ञात आत्मा ही बीज हे । अतः आप समूल उस
वृक्ष को उखाड़ फेंकिये और अपना हृदय आकाश के सदुश आवरणशून्य बना डालिये