Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
कुम्भ उवाच ।
अहमर्थोदयो योऽयं स चित्तावेदनात्मकः ।
एतच्चित्तद्रुमस्यास्य विद्धि बीजं महामते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
कुम्भ ने कहा : हे महामते, अहमर्थ से - अज्ञातात्मा से उदित जो यह
हृदयवेदनात्मक अभिमानी प्रसिद्ध है, वही इस चित्तरूपी वृक्ष का बीज (मूल) है, इसे आप जान
लीजिये