Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
चित्तवृक्षस्य तेन त्वं मूलकाषपरो भव ।
मुख्यत्वेन महाबुद्धे मूलदाहमलं कुरु ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे, मुख्यरूप
से इस चित्तरूपी करंजवन का निःशेष मूल दाह कीजिए, ऐसा करने से अचित्तता हो जायेगी