Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
कुम्भ उवाच ।
विद्यते यदि देहादिवस्तुसत्ता तदस्ति ते ।
अभावाद्देहसत्तादेः किंनिष्ठं तव वेदनम् ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह पूछे गये कुम्भ - विषयाकार से ज्ञान की उत्पत्ति होती है, इस तरह का जो भ्रम राजा
शिखिध्वज के हृदय में बैठा हुआ है उसका निवारण करने के लिए देहादि दृश्य पदार्थों में सत्त्व नहीं है,
यों प्रतिज्ञा करते हैं।
कुम्भ ने कहा : हे राजन्, यदि देहादि वस्तुओं की सत्ता रहती तब तो आपका अभिमत ज्ञान अपने
निमित्तभूत देहादि आकारवाला होता यानी देहादि आकार से ज्ञान की उत्पत्ति होती, किन्तु देहादि की
सत्ता का अभाव होने से वह ज्ञान किंविषयक होगा ? अर्थात् जब देह आदि की सत्ता ही नहीं है तब उस
ज्ञान का विषय होगा ही कौन ? अर्थात् ज्ञान निर्विषयक ही होगा