Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
हस्तपादादिसंयुक्तः क्रियाफलविलासवान् ।
सदानुभूयमानोऽयं देहो नास्ति कथं मुने ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, हाथ,
पैर आदि से संयुक्त तथा क्रिया-फलरूप विलास आदि से समन्वित सदा हम लोगों से अनुभूत हो रहा
यह शरीर कैसे नहीं है ?