Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
शिखिध्वज उवाच ।
हस्तपादादियुक्तस्य शरीरस्य मुनीश्वर ।
नित्यमालक्ष्यमाणस्य पिता कस्मान्न कारणम् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
इतिहास, अनुमान, आप्त पुरुषो की उक्ति तथा अनुगत स्थानसाम्यरूप हेतु आदि प्रमाण से इस
शरीर का कारण पिता तो अवश्य ज्ञात है, फिर इसका आप कैसे अपलाप करते हैं ? यो राजा शिखिध्वज
आशंका करते हैँ ।
राजा शिखिध्वज ने कहा : हे मुनीश्वर, हाथ, पैर आदि से युक्त प्रतिदिन दिखाई दे रहे इस शरीर
का भला पिता कारण कैसे नहीं है ?