Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 94, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 94, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
कुम्भ उवाच ।
आद्यः पितामहो यः स्यात्सोऽपि नास्त्येव भूपते ।
कारणाभावतो नित्यं यदा भावो न कस्यचित् ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका भी कारण बतलाना अत्यन्त कठिन है, हम कह नहीं सकते, अनिर्वचनीय है, अतः उसकी
भी असत्ता मे समान ही न्याय लगता है, इस अत्यन्त गूढ अभिप्राय को उत्तररूप से कहते है ।
कुम्भ ने कहा : हे भूपते, जव कारण के अभाव में किसीका भी भाव नहीं रहता यानी किसीकी भी सत्ता
नहीं ठहरती, यह सदा नियम है तब पितामह यानी हिरण्यगर्भ जो कारण है, वह भी हे ही नहीं