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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 96, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 96, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

कुम्भ उवाच । साधु पृष्टं महाराज राजसे वाथ भास्वरः । एतदेव हि ते शिष्टं ज्ञातुं यत्तदिदं श्रृणु ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

युक्ति-पूर्ण है और प्रश्नकर्ता आप कहे जानेवाले अर्थ के अवधारण मे प्ट भी हैं, यो प्रशंसा करते है। कुम्भ ने कहा : हे महाराज, मेने पहले जिस आत्मतत्व का उपदेश दिया था उसे ग्रहण कर अज्ञानरूपी आवरण से निर्मुक्त हो जाने के कारण आप देदीप्यमान होकर खूब शोभ रहे हैं। अब आपको जानने के लिए जो यह कुछ बच गया है उसे सुनिये