Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 98, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 98, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
जगद्दृश्यमिदं वास्यं तदेवोत्पन्नमेव नो ।
कारणाभावतः पूर्वमेवातश्चित्तता कुतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
चेतो हि वासनामात्रम्* इत्यादि श्लोक की व्याख्या करते हैं।
पहले तो कारण के अभाव से ही यह दृश्य वासना का विषय जगत् उत्पन्न ही नहीं हुआ है, अतः
चित्तरूपता आई कहाँ से ?