Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 98, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 98, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 98 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
न च सप्रतिघस्यास्य दृश्यस्याप्रतिघं क्वचित् ।
कारणं भवितुं शक्तं साकारस्य निराकृति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तब श्रुति में उक्तब्रह्मकारणतापक्ष का ही अवलम्बन कीजिए, इस पर कहते हैं।
साकार तथा प्रतिघातयुक्त इस दृश्य जगत् का कहीं पर भी निराकार प्रतिघातशून्य ब्रह्म कारण
नहीं हो सकता