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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 99, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 99, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

असंकल्पनमात्रेण सम्यग्ज्ञानोदयात्मना । संकल्पः क्षीयते सिद्ध्यै स्वयमेवासदात्मकः ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

शुद्ध कैवल्यात्मक बोध संकल्प के क्षय से सिद्ध होता है, यह कहते है । सम्यग्‌ ज्ञानोदय में हेतुभूत संकल्प के त्यागमात्र से मोक्ष की सिद्धि के लिए असदात्मक संकल्प अपने आप ही नष्ट हो जाता है