Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 1, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
नीरसा एव ते सन्तु समस्तेन्द्रियसंविदः ।
आकारमात्रसंलक्ष्या हेमन्तर्तौ लता इव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त इन्द्रियं के द्वारा विषयों के अनुभव आपको ऐसे
नीरस मालूम पड़े, जैसे कि हेमन्त ऋतु में सिर्फ अपने आकारमात्र से दिखाई दे रही लताएँ