Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 1, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सरसेन्द्रियवृत्तेस्ते कुर्वतोऽकुर्वतस्तथा ।
संसारानर्थसार्थोऽयं न कदाचन शाम्यति ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रियवृत्तियों को विषयों की ओर जाने से न रोकने में तथा उन्हें सरस बनाये रखने में क्या
होगा 2 इस आशंका पर कहते हैं /
यदि आपकी इन्द्रियवृत्तियाँ बाह्य विषयों की ओर लगी रहेगी तथा आप उन्हें सरस बनाये
रखेंगे, तो चाहे आप विषयों का उपभोग करें या न करें, किन्तु आपका यह संसार के अनर्थो
का समूह तो कभी भी शान्त न होगा