Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 1, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 1, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 1 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एतदेव परं धैर्यं जन्मज्वरनिवारणम् ।
यदवासनमभ्यस्ता निजकर्मसु कर्तृता ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जन्मरूपी ज्वर के निवारण के लिए यही सबसे बढ़कर उत्तम उपाय है कि अपने
कर्मो में जो कर्तृत्व अभ्यस्त हो, वह वासनारहित हो