Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 10, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
न च कारणमस्त्यत्र सर्गवृत्तावकारणे ।
नातः संजायते किंचिज्जगदादिर्न नश्यति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
तथा इस सृष्टिरचना में अकारण ब्रह्म में कोई कारण
नहीं है । जगत् आदि कुछ भी इससे न तो उत्पन्न होता है और न नष्ट ही होता है