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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 10, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 10, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अत्यन्तं कारणाभावान्न किंचिज्जायते जगत् । मरावम्ब्विव नास्त्येव दृष्टमप्यग्रतो जगत् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

कारण का अत्यन्त अभाव होने से जगत्‌ आदि कुछ भी उत्पन्न नहीं होता । मरुस्थल में जल की नाई सामने देखा गया भी यह जगत्‌ सर्वथा है ही नहीं