Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 100, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
संविदेव नृणां जीवः स यथा दृढभावनः ।
तथा सुखी वा दुःखी वा भवेदित्येष निश्चयः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
संवित् ही मनुष्यों का जीव (जीवात्मा)
है उसकी जैसी दृढ़ भावना होती है वैसा ही पुरुष सुखी या दुःखी होगा, ऐसा निश्चय है