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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 50

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 100, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

शरदाकाशविशदं संविदः सौम्यमानसाः । असन्त एव तिष्ठन्ति सन्तोऽधिगततत्पदाः ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

शरत्‌ ऋतु के समान निर्मल ज्ञानवाले शान्तचित्त तथा परम तत्त्व का साक्षात्कार कर चुके पुरुष चित्‌ से पृथक्रूप से असत्‌ ही हे ओर चिद्रूपसे तो सत्‌ ही हैं