Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 100, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 100, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सर्वशास्त्राविरुद्धेन सर्वं ब्रह्मेदमित्यलम् ।
स्थितं सानुभवं योक्तृ येषां तैर्न कथाक्रमः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिन महापुरुषों का देह, इन्द्रिय आदि की सकल व्यवहारों में नियुक्ति करनेवाला प्रत्यगात्म
चैतन्य या मन सकल शास्त्रों से अविरुद्ध सर्वं खल्विदं ब्रह्म (यह सब ब्रह्म ही है) इस प्रकार
के ज्ञान से प्रचुर मात्रा मे पूर्णकाम हो चुका हो, उन कृतार्थ पुरुषों के साथ भी उपदेश कथा
करना उचित नहीं है । केवल जिज्ञासु पुरुषों के लिए ही उपदेशवार्ता उचित है