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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

संविदाकाशमेवैतत्केनचिद्ब्रह्म कथ्यते । केनचित्प्रोच्यते ज्ञानं केनचिच्छून्यमुच्यते ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

अल्यवादी को आये कर, उसका सर्वप्रथम नाम लेकर उक्त अर्थ का विस्तार से वर्णन करते हैं / हे श्रीरामचन्द्रजी, इस संविदाकाश को ही कोई ब्रह्म कहते हैं, कोई विज्ञान कहते हैं कोई शून्य कहते हैं