Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
केनचिन्मदशक्त्याभं केनचित्पुरुषाभिधम् ।
केनचिच्च चिदाकाशं शिव आत्मा च केनचित् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई (१) मदिरा मद के तुल्य (%) (देहाकार में परिणत भूतधर्मभूत), कोई
(२) पुरुष, कोई (३) चिदाकाश तथा कोई (४) शिव एवं आत्मा कहते हैं