Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 101, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 101, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
न दुःखमेति मरणात्सुखमेति न जीवितात् ।
नाभिवाञ्छति न द्वेष्टि स तदास्ते विवासनः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
निर्विकल्प समाधि में निमग्नबुद्धि पुरुष न तो मृत्यु से दुःख को प्राप्त होता
है और न जीवन से सुख को ही प्राप्त होता है । वह किसी वस्तु की अभिलाषा नहीं करता और न
किसी से द्वेष ही करता है । वह वासनाशून्य होकर समाधि में स्थित रहता है