Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
चित्तादर्शगतं दृश्यं सर्वं कपटकुट्टिमम् ।
पश्यन्त्यसत्परिज्ञातं स्वप्ने हेमेव हस्तगम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वे लोग समस्त दृश्य को चित्तरूपी दर्पण
में प्रतिबिम्बित कपट भूमि के तुल्य ऐसे ही असत् देखते हैं जैसे कि स्वप्न में परिज्ञात हस्तगत
सुवर्ण को असद्रूप देखते हैं