Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 102, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 102, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 102 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
यो यादृक् क्लेशमाधातुं समर्थस्तादृगेव सः ।
अवश्यं फलमाप्नोति प्रबुद्धोऽस्त्वज्ञ एव वा ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो जैसा क्लेश सहन करने में समर्थ
है, वैसा ही वह अवश्य फल प्राप्त करता है, चाहे वह प्रबुद्ध हो या अज्ञानी हो